पटना, 07 जुलाई । मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में छापेमारी की। फेनहरा थाना क्षेत्र के कालूपाकड़ गांव स्थित आरोपित मोहम्मद कलामुद्दीन के घर पर एनआईए की टीम ने करीब पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया और उससे विस्तृत पूछताछ की।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह एनआईए की टीम सुरक्षा बलों के साथ कालूपाकड़ गांव पहुंची और घर को घेरकर तलाशी शुरू की। इस दौरान परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की गई तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच की गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, मोहम्मद कलामुद्दीन पर युवकों को विदेश में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह गोपालगंज के एक युवक के संपर्क में आया था और उसके माध्यम से लोगों को विदेश भेजने की प्रक्रिया में सहयोग करता था। आरोप है कि वह कंबोडिया जाने वाले युवकों के टिकट और यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं कराने में भी मदद करता था।
एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि कंबोडिया पहुंचने के बाद कई भारतीय युवकों को कथित तौर पर उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा जाता था। आरोप है कि उनसे ऑनलाइन साइबर ठगी, फर्जी कॉल सेंटर संचालन, डिजिटल फ्रॉड तथा अन्य साइबर अपराध कराए जाते थे। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट और प्रताड़ना किए जाने तथा भारत लौटने की अनुमति नहीं दिए जाने की शिकायतें भी जांच के दायरे में हैं।
छापेमारी के दौरान एनआईए अधिकारियों ने आरोपित से उसके संपर्कों, बैंक लेन-देन, विदेश यात्रा, मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया खातों और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुई बातचीत के संबंध में विस्तृत पूछताछ की। जांच के दौरान उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया, जिसकी फॉरेंसिक जांच कर उसमें मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा।
एनआईए ने फिलहाल मोहम्मद कलामुद्दीन को गिरफ्तार नहीं किया है। हालांकि, उसे आगे की पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर 13 जुलाई को पटना स्थित एनआईए कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि मोहम्मद कलामुद्दीन का नाम एनआईए के केस आरसी-10/2024/एनआईए/डीएलआई में शामिल है। यह मामला मानव तस्करी, विदेशी साइबर अपराध सिंडिकेट तथा भारतीय युवकों को कथित रूप से धोखे से विदेश भेजकर साइबर अपराधों में शामिल किए जाने वाले नेटवर्क की जांच से संबंधित है। एनआईए का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और इसके तार विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं। मामले की जांच जारी है।