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जलवायु परिवर्तन पर शोध को मिलेगा नया आयाम, IITM और ARIES के बीच हुआ समझौता

Posted on: 2026-06-20
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जलवायु परिवर्तन पर शोध को मिलेगा नया आयाम, IITM और ARIES के बीच हुआ समझौता

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे ने 18 जून 2026 को आर्यभट्ट अवलोकन विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज), नैनीताल के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऑनलाइन माध्यम से किया गया। एमओयू पर आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव और एरीज के निदेशक डॉ. मनीष कुमार नाजा ने हस्ताक्षर किए।

इस समझौते का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन पर सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देना और मौसम संबंधी आंकड़ों, ग्रीनहाउस गैसों, शॉर्ट-लिव्ड क्लाइमेट फोर्सर्स, मिट्टी की नमी समेत जलवायु से जुड़े विभिन्न मानकों की दीर्घकालिक निगरानी करना है।

एमओयू के तहत एरीज के देवस्थल केंद्र में भारत क्लाइमेट ऑब्जर्वेशन नेटवर्क (BCON) के हिस्से के रूप में एक क्लाइमेट ऑब्जर्वेशन स्टेशन स्थापित किया जाएगा।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित देवस्थल अपनी स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरणीय परिस्थितियों के कारण उन्नत वायुमंडलीय अध्ययन के लिए आदर्श स्थान माना जाता है। यहां ग्रीनहाउस गैसों, जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रदूषकों के परिवहन और हिमालयी क्षेत्र में जलवायु प्रक्रियाओं की गहन समझ विकसित की जा सकेगी।

BCON भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आईआईटीएम द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में उच्च सटीकता वाले दीर्घकालिक जलवायु निगरानी नेटवर्क का निर्माण करना है।

इस नेटवर्क के जरिए एक मजबूत राष्ट्रीय डेटा बेस तैयार किया जाएगा, जिससे जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक रुझानों की पहचान, शोध को मजबूती और साक्ष्य आधारित नीति निर्माण में मदद मिलेगी।

BCON के माध्यम से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़े अर्थ सिस्टम मॉडल्स (ESM) के सत्यापन और परीक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे भारत के पहले IITM ESM मॉडल को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के बेहतर पूर्वानुमान संभव होंगे।

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