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हाईटेक यात्री प्रतीक्षालय बना शोपीस, जनता के टैक्स का पैसा गलत प्राथमिकताओं में हो रहा बर्बाद?

Posted on: 2026-04-22
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हाईटेक यात्री प्रतीक्षालय बना शोपीस, जनता के टैक्स का पैसा गलत प्राथमिकताओं में हो रहा बर्बाद?

रायपुर। राजधानी में एक तरफ सड़क किनारे बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय एसी, बिजली और सुरक्षा जैसी सुविधाओं से लैस हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाल स्थिति में पड़ी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब करीब 100 बसें अब तक सड़कों पर नहीं उतरी हैं, तो प्रतीक्षालयों के मेंटेनेंस पर लगातार खर्च करने का औचित्य क्या है। सूत्रों के अनुसार, यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए बड़ी संख्या में बसों को शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद ये बसें पूरी तरह चालू नहीं हो पाई हैं।

इससे हजारों दैनिक यात्रियों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। दूसरी ओर, प्रतीक्षालयों में एसी चलाने, बिजली बिल चुकाने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में हर महीने अच्छा-खासा खर्च किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति योजनाओं की गलत प्राथमिकता को दर्शाती है। यदि बसें ही नहीं चलेंगी, तो यात्रियों के इंतजार के लिए बनाए गए प्रतीक्षालयों का क्या उपयोग रह जाएगा? ऐसे में प्रतीक्षालयों के रखरखाव पर खर्च किया जा रहा पैसा सीधे-सीधे जनता के टैक्स का दुरुपयोग प्रतीत होता है।

यह भी सवाल उठ रहा है कि संबंधित विभाग और प्रशासन आखिर इस देरी के लिए जिम्मेदार किसे मानते हैं। क्या बसों के संचालन में तकनीकी समस्या है, वित्तीय बाधा है या फिर केवल प्रशासनिक लापरवाही? जब करोड़ों रुपये खर्च कर बसें खरीदी गईं और प्रतीक्षालय बनाए गए, तो इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की परिवहन व्यवस्था उसकी जीवनरेखा होती है। यदि बस सेवा सुचारु नहीं होगी, तो ट्रैफिक, प्रदूषण और यात्रियों की समस्याएं बढ़ती जाएंगी।

 ऐसे में केवल दिखावटी सुविधाओं पर खर्च करना और मूलभूत सेवाओं को नजरअंदाज करना प्रशासनिक विफलता का संकेत माना जा सकता है। अब नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि 100 बसों को तुरंत सड़कों पर उतारा जाए, परिवहन व्यवस्था को नियमित और भरोसेमंद बनाया जाए, और यात्री प्रतीक्षालयों के मेंटेनेंस पर हो रहे खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए, लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला केवल अव्यवस्था का नहीं, बल्कि जनता के पैसे की जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन सकता है।


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