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बढ़ते हूथी खतरों के बीच US ने सऊदी अरब से स्टाफ़ को वापस भेजने का आदेश दिया

Posted on: 2026-10-22
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बढ़ते हूथी खतरों के बीच US ने सऊदी अरब से स्टाफ़ को वापस भेजने का आदेश दिया

यमन में ईरान से जुड़े हूथी विद्रोहियों से बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच, अमेरिका ने नॉन-इमरजेंसी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि यह फैसला सऊदी के सिविलियन एयरपोर्ट और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूथी हमलों के बढ़ने के बाद लिया गया है, जिससे मौतें हो रही हैं और यात्रा में रुकावट आ रही है।
 
यह कदम ईरान पर US-इज़राइल युद्ध के बाद बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच उठाया गया है, जिसने ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में रुकावट डाली है और खाड़ी की अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाला है। रियाद में US एम्बेसी ने हाल ही में सऊदी राजधानी के एयरपोर्ट सहित जानलेवा हमलों के बाद हौथी के और हमलों की चेतावनी दी थी।मध्य पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। यह फैसला यमन में सक्रिय हूथी विद्रोहियों की ओर से संभावित हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है। अमेरिका की इस कार्रवाई को खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात और ईरान से जुड़े संघर्ष के व्यापक प्रभावों के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में नागरिक हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे हूथी हमलों के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। इन हमलों में लोगों की जान जाने और परिवहन सेवाओं में बाधा उत्पन्न होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे हालात में अमेरिकी प्रशासन ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है।

सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में अमेरिकी कर्मचारियों को सऊदी अरब छोड़ने का निर्देश दिया जाना क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों की गंभीरता को दर्शाता है। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी हालिया हमलों के बाद संभावित खतरों को लेकर चेतावनी जारी की थी। सऊदी राजधानी के हवाई अड्डे सहित महत्वपूर्ण स्थानों पर हमलों की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हवाई अड्डों और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर हमले होने से आम नागरिकों की आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में ईरान से जुड़ा अमेरिका-इजरायल संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भी महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के प्रमुख तेल और गैस आपूर्ति केंद्रों में शामिल है। यहां सुरक्षा स्थिति बिगड़ने से कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी कर्मचारियों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश अपने आप में व्यापक सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षा जोखिमों के मद्देनजर उठाया गया एहतियाती कदम माना जाना चाहिए। आने वाले दिनों में हूथी विद्रोहियों की गतिविधियों, अमेरिकी प्रशासन की रणनीति और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

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