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ख्वाजा आसिफ बोले- पीटीआई नेता बुलेट प्रूफ सरकारी गाड़ियों में 'चूहों की तरह छिपे'

Posted on: 2026-10-05
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ख्वाजा आसिफ बोले- पीटीआई नेता बुलेट प्रूफ सरकारी गाड़ियों में 'चूहों की तरह छिपे'

इस्लामाबाद, 05 अक्टूबर  पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) नेताओं पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पीटीआई कार्यकर्ता सड़कों पर हथियार लेकर घूम रहे हैं। पार्टी के नेता बम प्रूफ और बुलेट प्रूफ सरकारी गाड़ियों में \"चूहों की तरह छिपे हुए हैं।\" महत्वपूर्ण यह है कि सरकार और पीटीआई के बीच इस्लामाबाद मार्च को लेकर बातचीत विफल हो चुकी है।

द न्यूज और डान की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने \'एक्स\' पोस्ट कहा कि पार्टी के वरिष्ठ सदस्य अदालत के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं और हथियारों से लैस काफिलों में घूम रहे हैं। उन्होंने विपक्षी पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर, सरकारी संसाधनों और हथियारों से लैस जुलूसों का इस्तेमाल अदालत के आदेशों का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने सवाल किया कि अगर अदालत के आदेशों का ही उल्लंघन हो रहा है, तो पीटीआई और सरकार के बीच किसी भी समझौते का सम्मान किए जाने की क्या गारंटी होगी। आसिफ ने यह भी कहा कि नेशनल एक्शन प्लान पर सभी पक्षों की सहमति और सम्मान था, लेकिन पीटीआई इसे मानने को तैयार नहीं है।

उधर, खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत में गांधी चौक से प्रांत के मुख्यमंत्री मोहम्मद सुहैल खान अफरीदी ने मार्च शुरू कर दिया है। पीटीआई महासचिव सलमान अकरम राजा ने रविवार को दावा किया कि रात भर चली बातचीत के नाकाम होने की मुख्य वजह संघीय सरकार की यह जिद थी कि खैबर पख्तूनख्वा में उसने जो आतंकवाद-विरोधी एकतरफा कार्रवाई शुरू की, उसे प्रांतीय सरकार अपनी कार्रवाई के तौर पर स्वीकार करे।

राजा ने \'एक्स\' पर कहा कि पीटीआई-टीटीएपी नेता अपने उस सैद्धांतिक रुख पर अडिग रहे कि ऐसा संघीय और राज्य सरकार की सहमति पर हो सकता है। इसे विधानसभा में सलाह-मशविरे और सहमति के बाद स्वीकार किया जा सकता है।

इस बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हुमायूं खान ने सरकार और पीटीआई के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए संवाद के जरिए राजनीतिक सुलह का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि टकराव से राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ेगी। रविवार को पेशावर में जारी बयान में पीपीपी नेता ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के लोग लंबे समय तक विरोध की राजनीति, सड़कों को जाम करने और लगातार राजनीतिक अनिश्चितता का बोझ नहीं उठा सकते, क्योंकि ऐसी घटनाओं का सीधा असर आम नागरिकों, व्यापारियों और कारोबारी समुदाय पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि बातचीत के दरवाजे खुले रखना लोकतांत्रिक राजनीति का मूल तत्व और एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को व्यक्तिगत और पार्टीगत मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित के मुद्दों के समाधान को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनानी चाहिए। पीपीपी नेता ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में कानून-व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी जन-सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर तत्काल राजनीतिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने संघीय और प्रांतीय सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कामकाजी संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को मजबूती मिल सकती है और राजनीतिक व प्रशासनिक स्थिरता में योगदान मिल सकता है।

खान ने राजनीतिक ताकतों से आग्रह किया कि वे टकराव के बजाय बातचीत पर ध्यान दें और देश की समस्याओं के व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मजबूती राजनीतिक स्थिरता, प्रांतीय सद्भाव और लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से अपनाए गए गंभीर राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़ी है।

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