5 अक्टूबर
को CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस
जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में CEC ज्ञानेश
कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई होगी.
इन याचिकाओं
में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था है.
इसके बावजूद, CEC ज्ञानेश
कुमार के नेतृत्व में कुछ फैसले और SIR से जुड़े सॉफ्टवेयर
में बदलाव दूसरे चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए. याचिकाकर्ताओं ने ऐसे
कथित फैसलों और बदलावों की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर सवाल उठाया है.
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने यह
याचिका दायर की है. इसमें सुप्रीम कोर्ट से पूछा गया है कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल अकेले किया, जो पूरे चुनाव आयोग को मिलकर करने थे.
याचिका में ऐसे फैसलों को कानूनी अधिकार के बिना लिया गया फैसला
घोषित करने की मांग की गई है. वहीं, अंतिम फैसला
आने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के कामकाज से अलग रखने की भी
मांग की गई है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है.
इसलिए उसके सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल केवल CEC अकेले
नहीं कर सकते. इसके लिए याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया है.
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका
में भी CEC के कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने पर सवाल उठाया
गया है. इसमें कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर CEC और दूसरे
अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है.
याचिका में SIR के दौरान Form 6
में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है. Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है. याचिकाकर्ता का आरोप है
कि सॉफ्टवेयर के जरिए इसमें पूर्व SIR से जुड़े विवरण और वंश
संबंधी जानकारी की जरूरत जोड़ी गई, जबकि इसके लिए निर्धारित
कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.