IMG-LOGO

आईएमएफ के एक अध्ययन में पाया गया है कि एआई से कुल श्रम उत्पादकता में 3.8% तक की वृद्धि हो सकती है।

Posted on: 2026-09-26
IMG
आईएमएफ के एक अध्ययन में पाया गया है कि एआई से कुल श्रम उत्पादकता में 3.8% तक की वृद्धि हो सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक नए कार्यपत्र के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) दीर्घकालिक रूप से कुल श्रम उत्पादकता में 3.8% तक की वृद्धि कर सकती है। इस शोधपत्र में विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पेटेंट और रोजगार संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि एआई से संबंधित नवाचारों के तीव्र विस्तार से उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि 2000 से 2017 के बीच एआई पेटेंट गतिविधियों के कारण प्रति श्रमिक उत्पादन में 0.8% से 1.2% की वृद्धि हुई है।
 
ये निष्कर्ष कल आईएमएफ के एक कार्यपत्र में प्रकाशित हुए, जिसका शीर्षक था \"कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समग्र श्रम उत्पादकता: पेटेंट डेटा से साक्ष्य\"। शोधकर्ताओं ने आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसी) से संबंधित देशों के पेटेंट डेटा का उपयोग करके श्रम उत्पादकता पर एआई तकनीक के समग्र प्रभाव का अध्ययन किया। यह अध्ययन 2000 से 2017 तक की अवधि को कवर करता है।
 
निष्कर्ष बताते हैं कि एआई मौजूदा कार्यों को केवल प्रतिस्थापित करने के बजाय कुशल कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्य का पूरक होने पर अधिक मजबूत आर्थिक लाभ उत्पन्न कर सकता है।

आईएमएफ के नए कार्यपत्र “कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समग्र श्रम उत्पादकता: पेटेंट डेटा से साक्ष्य” में बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आने वाले वर्षों में वैश्विक श्रम उत्पादकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है। शोध के अनुसार, एआई तकनीकों का व्यापक प्रसार दीर्घकाल में कुल श्रम उत्पादकता में 3.8% तक की वृद्धि कर सकता है। यह अनुमान इस बात को रेखांकित करता है कि एआई केवल एक नई तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और उत्पादन क्षमता को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण तकनीक बन सकती है।

इस अध्ययन में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) से संबंधित विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पेटेंट और रोजगार संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2000 से 2017 के बीच एआई से संबंधित पेटेंट गतिविधियों और श्रम उत्पादकता के बीच संबंध का अध्ययन किया। अध्ययन के अनुसार, इस अवधि में एआई से जुड़ी पेटेंट गतिविधियों के कारण प्रति श्रमिक उत्पादन में लगभग 0.8% से 1.2% तक की वृद्धि हुई। इससे संकेत मिलता है कि एआई नवाचारों का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता पर भी पड़ा।

शोध में यह भी पाया गया कि एआई का आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कार्यस्थल पर किस प्रकार लागू किया जाता है। यदि एआई का उपयोग कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले मौजूदा कार्यों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उनकी क्षमताओं और कौशल को बढ़ाने के लिए किया जाए, तो उत्पादकता लाभ अधिक मजबूत हो सकता है। उदाहरण के लिए, एआई डेटा विश्लेषण, शोध, निर्णय लेने और दोहराए जाने वाले कार्यों में सहायता देकर कर्मचारियों को अधिक जटिल और रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बना सकता है।

हालांकि, शोध के निष्कर्षों को एआई के भविष्य के प्रभाव का निश्चित अनुमान नहीं माना जाना चाहिए। अध्ययन मुख्य रूप से 2000–2017 के पेटेंट और रोजगार आंकड़ों पर आधारित है, जबकि वर्तमान एआई तकनीक, विशेषकर जनरेटिव एआई, उस समय की तुलना में काफी विकसित हो चुकी है। फिर भी, अध्ययन यह महत्वपूर्ण संकेत देता है कि तकनीकी नवाचार और मानव कौशल के बीच पूरक संबंध आर्थिक उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस दृष्टिकोण से एआई का प्रभाव केवल नौकरियों के प्रतिस्थापन के रूप में देखने के बजाय मानव श्रम की उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीक के रूप में भी समझा जा सकता है।

Tags: