केंद्र सरकार ने खनिज क्षेत्र में कर और शुल्क व्यवस्था को अधिक एकरूप, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य बनाने के उद्देश्य से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill, 2026) में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित किया जा चुका है।
खनिज देश के बुनियादी ढांचे, डिजिटल व्यवस्था, विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं। भारत में खनन गतिविधियों का नियमन मुख्य रूप से Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 के तहत होता है।
संशोधन विधेयक का उद्देश्य देशभर में खनिज क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित राजकोषीय ढांचा तैयार करना है।
संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में खनन क्षेत्र को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। इनमें खनन शुरू होने के बाद भी नए कर, उपकर और अन्य शुल्क लगाए जाना, राज्यों में अलग-अलग दरें और खनिजों के उत्पादन या परिवहन पर कई प्रकार के शुल्क शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ मामलों में कर और शुल्क पूर्वव्यापी प्रभाव से लगाए जाने से भी खनन कंपनियों के लिए कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता पैदा हुई।
अलग-अलग राज्यों में असमान कर व्यवस्था और अतिरिक्त शुल्क के कारण खनन की लागत बढ़ने तथा कुछ परियोजनाओं के आर्थिक रूप से कम व्यवहार्य होने की स्थिति सामने आई।
सरकार का कहना है कि अत्यधिक और अप्रत्याशित वित्तीय बोझ से छोटे और मध्यम खनन संचालक अधिक प्रभावित होते हैं। इससे स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं कमजोर हो सकती हैं और परिवहन लागत बढ़ने के साथ प्रदूषण भी बढ़ सकता है।
घरेलू खनिज आपूर्ति महंगी होने से पर्याप्त घरेलू संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद आयात पर निर्भरता बढ़ने का जोखिम भी रहता है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
1. खनिज-युक्त भूमि पर केंद्र का नियंत्रण
संशोधन के तहत खनिज सामग्री वाली भूमि को भी केंद्र के नियामक दायरे में लाया जाएगा। ऐसी भूमि की पहचान केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार की जाएगी।
यह प्रावधान खदानों के नियमन और खनिजों के विकास पर केंद्र के मौजूदा नियंत्रण के अतिरिक्त होगा।
2. राज्यों द्वारा नए शुल्क लगाने पर सीमा
विधेयक में नई धारा 9D जोड़ी गई है। इसके तहत राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर किसी भी नाम से कर, उपकर या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी।
हालांकि, ऐसे शुल्क केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अधीन लगाए जा सकेंगे।
यह प्रावधान खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर लगाए जाने वाले शुल्क पर लागू होगा।
3. पुराने शुल्कों का प्रावधान
संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा लगाया गया कोई ऐसा शुल्क, जो अभी तक भुगतान या वसूल नहीं किया गया है, अमान्य माना जाएगा।
हालांकि, संशोधन लागू होने से पहले जो राशि जमा या वसूल की जा चुकी है, उसे वापस करने का प्रावधान नहीं होगा।
4. केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति
MMDR Act की धारा 13 में संशोधन कर केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति दी जाएगी।
इन नियमों के माध्यम से राज्यों द्वारा ऐसे शुल्क लगाए जाने की शर्तें और सीमाएं निर्धारित की जाएंगी।
खनन क्षेत्र पर क्या होगा असर?
सरकार के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमेयता लाना है।
पहले अलग-अलग राज्यों में खनिजों पर अलग-अलग कर और शुल्क लागू हो सकते थे। संशोधन के बाद केंद्र द्वारा निर्देशित ढांचे के तहत अधिक एकरूप व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे खनन कंपनियों के लिए लागत का अनुमान लगाना आसान होगा और निवेश संबंधी निर्णयों में अनिश्चितता कम होगी।
छोटे और मध्यम खनन संचालकों को भी समान राजकोषीय व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।
पहले और अब
पहले | संशोधन के बाद |
खनिज-युक्त भूमि केंद्र के नियामक दायरे से बाहर थी | खनिज-युक्त भूमि को केंद्र के नियमन में लाया जाएगा |
राज्यों में खनन पर अलग-अलग कर व्यवस्था थी | केंद्र द्वारा निर्देशित समान ढांचे की व्यवस्था |
खनन शुरू होने के बाद भी नए शुल्क लगाए जा सकते थे | नए शुल्क केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन होंगे |
पूर्वव्यापी कर मांगों की संभावना थी | लंबित पूर्वव्यापी देनदारियां अमान्य होंगी |
छोटे और मध्यम खनन संचालकों पर अधिक वित्तीय दबाव पड़ सकता था | समान और संतुलित व्यवस्था का लक्ष्य |
महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा समर्थन
सरकार के अनुसार, अधिक स्थिर और समान राजकोषीय व्यवस्था से खनिज अन्वेषण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, संसाधन सुरक्षा और टिकाऊ खनिज विकास के लिए भी अहम हो सकता है।
खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत के लिए घरेलू संसाधनों का प्रभावी और टिकाऊ इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। सरकार का मानना है कि MMDR संशोधन विधेयक देश की खनिज शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाने और Viksit Bharat के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान देगा।