राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने बुधवार को ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाओं की शुरुआत की। एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों सेवाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। इसे अधिकरण की रजिस्ट्री को अधिक सुलभ और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई सेवाओं के माध्यम से अधिवक्ताओं, वादकारियों और अन्य हितधारकों को न्यायिक अभिलेखों और प्रमाणित प्रतियों तक सुविधाजनक तथा त्वरित पहुंच मिल सकेगी।
डिजिटल परिवर्तन का हिस्सा हैं नई सेवाएं
न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएं एनसीएलटी के व्यापक डिजिटल परिवर्तन का हिस्सा हैं। इसके तहत नए स्वरूप में तैयार की गई एनसीएलटी वेबसाइट और चल रही ई-कोर्ट्स 2.0 पहल भी शामिल है। इन डिजिटल सुविधाओं का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों तक पहुंच को अधिक सरल और प्रभावी बनाना है।
लंबित मामलों की निगरानी के लिए डेटा आधारित व्यवस्था
एनसीएलटी अध्यक्ष ने मामलों के प्रबंधन में सुधार और लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। अधिकरण ने विभिन्न पीठों में लंबित मामलों की निगरानी के लिए डेटा आधारित व्यवस्था अपनाई है। इसके तहत जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर कार्यभार की समीक्षा और उसका पुनर्वितरण किया गया। जरूरत के अनुसार विशेष पीठों का गठन किया गया और उपलब्ध न्यायालयीन समय के अधिकतम उपयोग के प्रयास किए गए।
पहली तिमाही में 78 समाधान योजनाओं को मंजूरी
इन उपायों के परिणामस्वरूप अप्रैल से जून 2026 के दौरान 78 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी गई। यह दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के लागू होने के बाद किसी पहली तिमाही में अब तक का सर्वाधिक प्रदर्शन है। इन मामलों में लगभग 5,517.66 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। यह उपलब्धि लंबित मामलों के प्रभावी निपटारे और न्यायिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मामलों की सूचीबद्धता को लेकर दिशा-निर्देश
एनसीएलटी ने सीमित न्यायिक संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बार के साथ परामर्श कर मामलों के पंजीकरण और सूचीबद्धता से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनका उद्देश्य मामलों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना और उपलब्ध न्यायिक समय का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की चुनौती बरकरार
न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि अधिकरण अभी भी बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद अनावश्यक देरी को कम करने और कार्यकुशलता में सुधार लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और मामलों की बेहतर निगरानी पर जोर दिया।
पारदर्शी और हितधारक अनुकूल न्याय व्यवस्था की ओर कदम
ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाओं की शुरुआत एनसीएलटी की न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल और हितधारकों के अनुकूल बनाने के लगातार प्रयासों का हिस्सा है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से न्यायिक अभिलेखों तक पहुंच आसान होने के साथ अधिवक्ताओं, वादकारियों और अन्य हितधारकों के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।