चेन्नई :
चेन्नई में वर्ल्ड बैंक ग्रुप की एक नई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक ऊर्जा बाजार में
इस साल कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया
गया है कि ऊर्जा की कीमतें करीब 24
प्रतिशत तक
बढ़ सकती हैं, जो 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के
बाद देखे गए उच्च स्तर के करीब या उससे भी ऊपर जा सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा
गया है कि अगर वैश्विक संघर्ष या युद्ध की स्थिति और बढ़ती है, तो कच्चे तेल की कीमतें सालभर में
औसतन 115 डॉलर प्रति बैरल तक
पहुंच सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय मानी जा रही
है, क्योंकि ऊर्जा की
कीमतों का सीधा असर महंगाई और उत्पादन लागत पर पड़ता है।
वर्ल्ड
बैंक की रिपोर्ट के अनुसार,
केवल ऊर्जा
ही नहीं बल्कि फर्टिलाइजर और कई प्रमुख धातुओं की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी
देखी जा रही है। कुछ महत्वपूर्ण मेटल्स पहले ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच चुके
हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई
चेन पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2026 में कमोडिटी कीमतों में औसतन 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
इसमें ऊर्जा, कृषि उत्पाद और औद्योगिक
धातुएं शामिल हैं। यह वृद्धि वैश्विक मांग, आपूर्ति
में असंतुलन और भू-राजनीतिक तनावों के कारण बताई जा रही है।
विशेषज्ञों
के अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में यह
संभावित उछाल दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है। खासकर विकासशील
देशों पर इसका अधिक असर पड़ने की संभावना है, जहां ऊर्जा
और खाद्य वस्तुओं की कीमतें पहले से ही लोगों की खरीद क्षमता पर दबाव डाल रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा
कारण भू-राजनीतिक तनाव है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से ही ऊर्जा आपूर्ति
श्रृंखला प्रभावित हुई है,
जिसका असर
अब भी जारी है।
फर्टिलाइजर
की कीमतों में वृद्धि का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और अंततः
खाद्य महंगाई में इजाफा हो सकता है। वहीं, धातुओं की
कीमतों में बढ़ोतरी से निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले समय में
वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई देश पहले से ही
महंगाई और आर्थिक सुस्ती से जूझ रहे हैं, ऐसे में
ऊर्जा और कमोडिटी की बढ़ती कीमतें स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।
वर्ल्ड
बैंक की रिपोर्ट यह भी बताती है कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों का
भरोसा प्रभावित हो सकता है। इससे वैश्विक व्यापार और उत्पादन पर भी असर पड़ने की
आशंका है। कुल मिलाकर यह रिपोर्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा और
कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, जिसका सीधा
प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था,
उद्योग और
आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।