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अमेरिकी मिडटर्म में ट्रंप की परीक्षा रिपब्लिकन बहुमत पर मंडराया खतरा

Posted on: 2026-11-01
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अमेरिकी मिडटर्म में ट्रंप की परीक्षा रिपब्लिकन बहुमत पर मंडराया खतरा

मेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा बन गए हैं। इन चुनावों में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और सीनेट—के सदस्यों के साथ कई राज्यों के गवर्नर भी चुने जाएंगे। हालांकि मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति का पद दांव पर नहीं होता, लेकिन इनके नतीजों को आमतौर पर राष्ट्रपति के कामकाज और नीतियों पर जनता की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच हो रहे इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बचाए रखने की चुनौती है। फिलहाल प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बेहद कम है। उसके पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 सीटें हैं और दो सीटें रिक्त हैं। प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को चार सीटों का शुद्ध लाभ चाहिए। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी 53-47 के अंतर से आगे है। यहां भी बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को चार सीटें जीतनी होंगी। इस लिहाज से दोनों सदनों का नियंत्रण चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

चुनाव से पहले सामने आए सर्वेक्षणों में ट्रंप की लोकप्रियता और रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति को लेकर कई संकेत मिले हैं। 26 अक्टूबर को जारी रॉयटर्स-इप्सोस सर्वेक्षण के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत रही। इसी सर्वेक्षण में पंजीकृत मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 47 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 36 प्रतिशत समर्थन मिला। महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें और रोजमर्रा की वस्तुओं का खर्च मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। सर्वेक्षण में 73 प्रतिशत लोगों ने कहा कि जीवन-यापन की लागत गलत दिशा में जा रही है। अर्थव्यवस्था और महंगाई से जुड़ी नाराजगी का असर उन राज्यों में भी देखने को मिल सकता है, जहां सीनेट की सीटों पर कड़ा मुकाबला है

डेमोक्रेटिक पार्टी की नजर प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने पर है। यदि पार्टी ऐसा करने में सफल रहती है, तो उसे ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जांच के लिए संसदीय समितियों का इस्तेमाल करने और विधायी फैसलों पर दबाव बनाने का अवसर मिलेगा। बजट, सरकारी खर्च और प्रशासनिक नियुक्तियों से जुड़े मुद्दों पर भी व्हाइट हाउस को विपक्ष के साथ बातचीत करनी पड़ सकती है। सीनेट में बहुमत बदलने की स्थिति में वरिष्ठ सरकारी पदों और न्यायिक नियुक्तियों की पुष्टि की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि किसी भी बड़े कानून को पारित कराने में राष्ट्रपति की वीटो शक्ति और सीनेट की प्रक्रियागत बाधाएं महत्वपूर्ण रहेंगी

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