10 साल बाद बाजार को लगने वाली है नजर! शेयर मार्केट में सुनामी का खतरा; जानें क्या कहती है रिपोर्ट
Posted on:
2026-10-02
10 साल बाद बाजार को लगने वाली है नजर! शेयर मार्केट में सुनामी का खतरा; जानें क्या कहती है रिपोर्ट
अगर आप शेयर
बाजार में पैसा लगाते हैं या म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल,
एम्बिट इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक,
2015 से 2025 तक सेंसेक्स के लगातार 10
साल के अच्छे प्रदर्शन के बाद 2026 में भारतीय
शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है. खासकर मिडकैप यानी मझौली कंपनियों और
स्मॉलकैप यानी छोटी कंपनियों के शेयरों के गिरने की ज्यादा संभावना है.
बाजार को लेकर क्या है असली चिंता
- एम्बिट
इक्विटीज की मानें तो भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ सालों में निवेशकों को
अच्छा रिटर्न दिया है. सेंसेक्स ने 2016 से 2025 तक लगातार 10 साल फायदे वाला रिटर्न दिया है.
लेकिन एम्बिट का कहना है कि अब बाजार के सामने कई मुश्किलें एक साथ खड़ी हो
रही हैं.
- कच्चे तेल की
कीमत बढ़ सकती है,
ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में तेजी आ सकती है, कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. इसके अलावा अर्थव्यवस्था की रफ्तार
में कुछ कमी के संकेत मिल रहे हैं. और इन सबका असर कंपनियों की कमाई और
शेयरों की कीमत पर पड़ सकता है.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को लेकर क्या है चिंता
- मिडकैप (मझौली
कंपनियां) और स्मॉलकैप(छोटी कंपनियां) शेयरों ने पिछले कुछ समय में निवेशकों
का काफी ध्यान खींचा है. बहुत से लोगों ने इन शेयरों में पैसा लगाया और उनकी
कीमतें तेजी से बढ़ी. जिसको लेकर समस्या यह है कि कई शेयर अब काफी महंगे हो
गए हैं. एम्बिट के मुताबिक सितंबर 2024 से मिडकैप और
स्मॉलकैप शेयरों की औसत वैल्यूएशन करीब 35 से 40
गुना बढ़ी है.
इसे उदाहरण से ऐसे समझिए...
- मान लीजिए
किसी कंपनी की सालाना कमाई 10 रुपये है और उसके शेयर की कीमत 400
रुपये है. तो इसका मतलब हुआ कि निवेशक उस शेयर से एक रुपये की
कमाई के लिए 40 रुपये देने को तैयार हैं.
- लेकिन अगर
कंपनी की कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती, तो संभव है
निवेशक इतना ज्यादा पैसा देने को तैयार नहीं हो, ऐसे
में शेयर की कीमत तेजी से नीचे आ सकती है. यही वजह है कि एम्बिट मिडकैप और
स्मॉलकैप जैसे शेयर में ज्यादा सावधानी बरतने की बात कर रहा है.
पिछले कुछ समय से लार्जकैप क्यों पीछे रहे?
- रिपोर्ट के
मुताबिक पिछले दो वर्षों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन
किया है लेकिन इसकी तुलना में बड़े यानी लार्जकैप(बड़ी कंपनियां) शेयरों में
ज्यादा तेजी नहीं देखी गई.
- मार्च 2026 के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कुछ तेजी जरूर आई है लेकिन
एम्बिट का मानना है कि इस तेजी का एक हिस्सा पहले की गिरावट के बाद शेयरों की
कीमत सामान्य होने की वजह से आया. यानी जिस शेयर की कीमत पहले गिर गई थी,
वह दोबारा कुछ ऊपर आ गया।
- हालांकि असली
सवाल यह है कि शेयरों में आई तेजी से कंपनियों की कमाई कितनी बढ़ती है.
क्योंकि अगर कमाई की रफ्तार कमजोर रही और शेयर पहले से महंगा है, तो गिरावट का खतरा बढ़ सकता है.
विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं, फिर बाजार संभला कैसे?
- भारतीय बाजार
में इस समय एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है. विदेशी निवेशक यानी FII भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाल रहे हैं. एम्बिट के
मुताबिक विदेशी निवेशकों ने करीब 56 अरब डॉलर के भारतीय
शेयर बेचे हैं.
- लेकिन दूसरी
तरफ भारतीय संस्थागत निवेशक यानी DII लगातार खरीदारी कर
रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान डीआईआई ने करीब 175 अरब डॉलर का निवेश किया है.
- इसका मतलब यह
हुआ कि विदेशी निवेशकों की बिक्री का असर घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने काफी
हद तक संभाल लिया.
- मार्च 2026 में डीआईआई की भारतीय शेयर बाजार में हिस्सेदारी 16.7 प्रतिशत हो थी, जबकि एफआईआई की हिस्सेदारी 15.3
प्रतिशत रही. यानी पहली बार घरेलू संस्थागत निवेशकों की
हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों से ज्यादा हो गई.
फिर भी बाजार में तेजी क्यों नहीं आ रही?
- एम्बिट की
रिपोर्ट में एक अहम सवाल है कि अगर घरेलू निवेशक इतनी बड़ी रकम लगा रहे हैं, तो बाजार लगातार ऊपर क्यों नहीं जा रहा?
- रिपोर्ट के
मुताबिक बाजार पिछले कुछ समय से एक सीमित दायरे में घूम रहा है। यानी बड़ी
तेजी भी नहीं आई और बाजार पूरी तरह टूट भी नहीं गया.
- जिसका एक
संकेत यह है कि बाजार को ऊपर ले जाने के लिए सिर्फ पैसा आना पर्याप्त नहीं
है. कंपनियों की कमाई बढ़ना और शेयरों की कीमत का उचित स्तर पर होना भी जरूरी
है.