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उत्तराखंड का चंद्रबदनी देवी मंदिर, मंदिर में मूर्ति की जगह श्री यंत्र की होती है पूजा

Posted on: 2026-09-18
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उत्तराखंड का चंद्रबदनी देवी मंदिर, मंदिर में मूर्ति की जगह श्री यंत्र की होती है पूजा

उत्तराखंड की वादियों में देवियां वास करती हैं, जिनमें हर एक का अपना अलग महत्व और मान्यता है। ऐसी ही एक पवित्र और मनोकामना पूर्ति देवी हैं, मां चंद्रबदनी। चंद्रबदनी देवी मंदिर एक हिंदू तीर्थ स्थल है, जो उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले के जमनीखाल नाम के एक छोटे से गांव में स्थित है। इस मंदिर में मूर्ति की जगह श्री यंत्र की पूजा की जाती है।

टिहरी जिले में समुद्र तल से लगभग 2277 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम है।

मां चंद्रबदनी मंदिर शक्ति पूजा का एक बड़ा केंद्र

मंदिर को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने आज शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, “जनपद टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर है, जो शक्ति पूजा का एक बड़ा केंद्र है। यहां आस्था, प्रकृति और दिव्यता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। चारों ओर फैली हिमालय की शानदार पहाड़ियां इस जगह को एक अलग ही दुनिया जैसा एहसास देती हैं। यहां हर पल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। आप भी टिहरी गढ़वाल आने पर इस पवित्र मंदिर में जरूर माथा टेकें।”

यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों और घने जंगलों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो हर भक्त के मन को मोह लेता है।

चंद्रबदनी मंदिर कुंजापुरी और सुरकंडा मंदिर के बाद टिहरी का तीसरा शक्ति पीठ

आपको बता दें, माता सती को समर्पित चंद्रबदनी मंदिर कुंजापुरी और सुरकंडा मंदिर के बाद टिहरी का तीसरा शक्ति पीठ है। मंदिर के गर्भ गृह में माता की मूर्ति के स्थान पर एक श्री यंत्र है, जिसे कपड़े के छत्र के नीचे रखा गया है। मंदिर के पुजारी और सभी श्रद्धालु इस यंत्र की उपासना एवं पूजा कर माता का आशीर्वाद लेते हैं। इस यंत्र के अतिरिक्त मंदिर में अन्य देवी देवताओ की मूर्ति भी स्थापित की गई है।

ऊंचाई पर स्थित होने के चलते मंदिर से नजदीकी क्षेत्रों का बेहद ही विहंगम नजारा दिखाई पड़ता है। दूर केदारनाथ और बद्रीनाथ पर्वत की बर्फ से ढकी चोटियां बेहद ही उम्दा और आकर्षक दिखाई पड़ती हैं। टिहरी के जामनीखाल गांव में स्थित यह मंदिर श्रीनगर से 52 किमी और टिहरी से लगभग 57 किमी की दूरी पर है। मंदिर तक पहुंचने का रास्ता एक किमी के ट्रेक से होकर गुजरता है।

पौराणिक मान्यता

इस मंदिर की कहानी का जिक्र स्कंद पुराण में मिलता है। जब भगवान शिव माता सती का जला हुआ शरीर ले जा रहे थे (जिन्होंने अपने पति भगवान शिव के अपमान का विरोध करने के लिए अपने पिता दक्ष प्रजापति के महायज्ञ में कूदकर प्राण त्याग दिए थे), तो उनके शरीर के अंग अलग-अलग जगहों पर गिरे और वे स्थान सिद्धपीठ बन गए। चंद्रबदनी मंदिर शक्तिपीठों में से एक है और देवी सती का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह मंदिर उस जगह पर स्थित है, जहां भगवान शिव द्वारा देवी सती के जले हुए शरीर को ले जाते समय उनका धड़ गिरा था। उनके हथियार भी इसी जगह पर बिखरे हुए थे।

पुराणों के अनुसार जब माता सती का धड़ इस थान पर गिरा था उस दौरान माता के कुछ त्रिशूल और मुर्तिया भी गिरी थी, जिसके चलते यहां आज भी त्रिशूल और माता की मूर्तिया मंदिर के आस पास देखी जाती है। मंदिर परिसर में स्थापित असंख्य त्रिशूल और कुछ मूर्तियां उत्तराखंड के इस हिंदू तीर्थस्थल की सुंदरता को और भी बढ़ा देती हैं। हर साल अप्रैल के महीने में चंद्रबदनी मंदिर परिसर में एक बड़ा मेला लगता है। जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

प्राचीन और रहस्यमयी तीर्थस्थल

यह प्राचीन और रहस्यमयी तीर्थस्थल न केवल एक महत्वपूर्ण तीर्थ-स्थान है, बल्कि अपनी गहरी ऊर्जा, दिव्य आभा और पौराणिक इतिहास के लिए जाना जाने वाला एक आध्यात्मिक केंद्र भी है। हिमालय के मनमोहक नजारों और समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के साथ, चंद्रबदनी भक्तों और यात्रियों, दोनों के लिए एक यादगार अनुभव प्रदान करता है।

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