भारत ने विश्व बैंक
द्वारा सिंधु जल संधि पर गठित मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को पूरी तरह से खारिज
कर दिया है। भारत ने न्यायाधिकरण के अधिकार को नकारते हुए उसके निर्णय को कानूनी
रूप से अमान्य बताया है।
विदेश
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत ने मध्यस्थता पैनल को कभी मान्यता
नहीं दी, न
ही उसकी कार्यवाही में भाग लिया और न ही उसके निर्णयों से बाध्य होगा। भारत ने यह
भी दोहराया कि सिंधु जल संधि अभी भी स्थगित है।
यह बयान
हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि
संधि को स्थगित करने के भारत के कारण इसके निलंबन या समाप्ति को उचित नहीं ठहराते।
पैनल ने भारत से 1960 के जल-बंटवारे समझौते के अंतर्गत अपने
दायित्वों का पालन जारी रखने का आह्वान किया।
हालांकि, भारत ने इस फैसले को
खारिज करते हुए तर्क दिया कि मध्यस्थता पैनल की स्थापना ही संधि की शर्तों का
उल्लंघन करते हुए की गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि संधि या उसकी अवसंरचना
परियोजनाओं से संबंधित भारत के संप्रभु निर्णयों पर पैनल का कोई अधिकार क्षेत्र
नहीं है। पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा
चिंताओं और लगातार जारी सीमा पार आतंकवाद का हवाला देते हुए भारत ने सिंधु जल संधि
को निलंबित कर दिया था।
भारत का
कहना है कि संधि पर उसका निर्णय संप्रभुता का मामला है और मध्यस्थता पैनल के बयान
या फैसले जल और अवसंरचना परियोजनाओं से संबंधित उसकी कार्रवाइयों को प्रभावित नहीं
करेंगे।