उज्जैन : भादौ माह की पहली सवारी आज, शाम 4 बजे पांच स्वरूपों में नगर भ्रमण करेंगे बाबा महाकाल
Posted on:
2026-08-31
उज्जैन : भादौ माह की पहली सवारी आज, शाम 4 बजे पांच स्वरूपों में नगर भ्रमण करेंगे बाबा महाकाल
उज्जैन, 31 अगस्त मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद माह की पहली और भगवान महाकाल की पांचवीं सवारी आज शाम 4 बजे निकलेगी। मंदिर के सभामंडप में पूजन-अर्चन के बाद बाबा महाकाल पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के पांच स्वरूपों में दर्शन होंगे। सवारी को लेकर मंदिर और प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सभामंडप में पूजन के बाद बाबा महाकाल की पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचेगी, जहां सशस्त्र पुलिस बल के जवान भगवान को सलामी देंगे। इसके बाद सवारी निर्धारित मार्ग से नगर भ्रमण के लिए रवाना होगी। सवारी में घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड, भजन मंडली, झांझ मंडली और पुलिस बैंड शामिल रहेंगे।
रामघाट पर होगा पूजन-अभिषेक
बाबा महाकाल की सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां मां क्षिप्रा के जल से भगवान महाकाल का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद सवारी पुन: मंदिर के लिए रवाना होगी।
वापसी मार्ग: रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार होते हुए सवारी महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
फेसबुक और एलईडी से सजीव प्रसारण
महाकाल की सवारी का सजीव प्रसारण मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पेज पर किया जाएगा। इसके साथ ही सवारी के अंतिम हिस्से में चलित रथ पर लगी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भी श्रद्धालु सवारी के दर्शन कर सकेंगे।
भस्म आरती में साकार स्वरूप में सजे बाबा महाकाल
इधर, सोमवार तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ भस्म आरती की शुरुआत हुई। पुजारी और पुरोहितों ने गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल के बाद भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार और ध्यान के बाद कपूर आरती हुई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म चढ़ाने की परंपरा पूरी की गई।
भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन, त्रिपुंड और आभूषणों से विशेष शृंगार किया गया। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा मोगरे और गुलाब के पुष्प अर्पित किए गए। फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामना कही। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के कारण महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।