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हूती के निशाने पर आई सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी की आग बुझी, उत्पादन शुरू करने की मियाद बढ़ाई गई

Posted on: 2026-08-11
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हूती के निशाने पर आई सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी की आग बुझी, उत्पादन शुरू करने की मियाद बढ़ाई गई

 हूती के निशाने पर आई सऊदी अरब की राष्ट्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी \'सऊदी अरामको\' की आग बुझा ली गई है, लेकिन प्रबंधन ने अपनी जिजान रिफाइनरी को दोबारा शुरू करने की मियाद बढ़ा दी है। इससे साफ है कि जुलाई और अगस्त में हुए हूती (अंसार अल्लाह) के हमले से हुए नुकसान का असर अभी भी बना हुआ है। दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में स्थित यह रिफाइनरी 27 जुलाई से बंद है। हमले के दौरान आग लगने से इंटीग्रेटेड गैसीफिकेशन कंबाइंड-साइकिल कॉम्प्लेक्स और टैंक फार्म को नुकसान पहुंचा था।

यमन प्रेस एजेंसी (वाईपीए) और अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने दावा किया है कि रिफाइनरी को शुरू करने की संभावित तारीख 30 अगस्त तय की गई है। पहले का लक्ष्य अगस्त के मध्य का था। जिजान रिफाइनरी सऊदी अरब के ऊर्जा क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 400,000 बैरल प्रतिदिन है और घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में इसकी अहम भूमिका है।

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय की रविवार की घोषणा ने स्थिति को और जटिल बना दिया। मंत्रालय ने बताया कि अरामको की इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फायर फाइटिंग टीमों ने जिजान रिफाइनरी की एक सुविधा में लगी आग को बुझा दिया है। मंत्रालय ने रिफाइनरी को फिर से शुरू करने की कोई जानकारी नहीं दी। इससे इसके दोबारा चालू होने की वास्तविक समय-सीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हूती ने 9 अगस्त को जिजान रिफाइनरी में हमला करने की जिम्मेदारी ली थी। हूती ने कहा था कि यह हमला यमन के सादा और हज्जा प्रांतों पर सऊदी ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया। महत्वपूर्ण यह है कि हूती यमन का चरमपंथी, राजनीतिक और सैन्य संगठन है। यह मुख्य रूप से यमन के उत्तरी हिस्से के जैदी शिया मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है। इसे ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है। अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हूती को आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं।

सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हूती के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की अपील भी दोहराई है। बताया गया कि हूती का यह हमला पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के शुक्रवार को \"मक्का संयुक्त रक्षा समझौते\" पर हस्ताक्षर करने के बाद हुआ। इस रिफाइनरी की शुरुआत 1933 में अमेरिकी कंपनियों के साथ एक समझौते के तहत हुई थी। 1980 के दशक में सऊदी सरकार ने इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया। इस समय सऊदी अरामको का बाजार मूल्य भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 162 लाख करोड़ रुपये है। इस कंपनी के पास भूमिगत तेल का विशाल भंडार (267 बिलियन बैरल) है।

इस बीच यमन सरकार की समर्थक सेना ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर अल-मखा (मोचा) पर फिर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और बंदरगाह की सुविधाओं को निशाना बनाया। इस हमले में कम से कम दो यमन के सरकारी सैनिक मारे गए। हूती ने अदन, मोचा और शबवा में सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों पर ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। कहा गया है कि यमन सरकार समर्थित सेना हमलों का जवाब दे रही है।

स्थानीय मीडिया और पीड़ितों के दोस्तों की सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, मारिब के साथ सीमा के पास नजद मरगाद में शबवा डिफेंस फोर्सेज की एक चौकी पर हूती ने ड्रोन किया, जिसमें दो सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में भी गोलीबारी की आवाज सुनी गई। अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का केंद्र है।

इस बीच यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन डॉ. रशाद अल-अलीमी ने सोमवार को रियाद में कहा कि ईरान समर्थित आतंकवादी हूती समूह को एकजुटता के साथ जवाब देने का वक्त आ गया है। यह परिदृश्य देश में शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता की एक नई परीक्षा है। डॉ. रशाद ने रियाद में उन देशों के राजदूतों को संबोधित किया जो यमन में शांति प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं। इन देशों में सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात के अलावा ईरान भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र अपने विशेष दूत के माध्यम से औपचारिक शांति वार्ताओं का संचालन कर रहा है।

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