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मप्र के भोजशाला में हनुमान-चालीसा पाठ के साथ हुई पूजा-अर्चना, श्रद्धालु बोले- वर्षों बाद हो रहा बिना रोक-टोक दर्शन

Posted on: 2026-05-16
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मप्र के भोजशाला में हनुमान-चालीसा पाठ के साथ हुई पूजा-अर्चना, श्रद्धालु बोले- वर्षों बाद हो रहा बिना रोक-टोक दर्शन

धार, 16 मई । मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद शनिवार सुबह श्रद्धालुओं और अलग-अलग समितियों के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल में भोजशाला पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।

भोजशाला विवाद मामले में उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद शुक्रवार से ही शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे शहर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात है। शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया।

दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है। मुस्लिम पक्ष की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें उच्चतम न्यायालय जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर था, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगा। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवादित मालले में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने भोजशाला को राजा भोज के समय का वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना और हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दे दिया है। फैसले के बाद शनिवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे और दर्शन और पूजा-अर्चना की। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।

उच्चतम न्यायालय में 2 कैविएट याचिकाएं दायर

हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। इस आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को तय अवधि के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। मुस्लिम पक्ष के उच्चतम न्यायालय जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने दो कैविएट याचिकाएं दायर की हैं। अधिवक्ता जैन ने बताया कि उच्च न्यायालय ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

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