केंद्रीय मंत्री रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन विकास पहलों की समीक्षा करने और मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 2 और 3 नवंबर को सिक्किम के गंगटोक और मंगन जिलों का दौरा करेंगे।
दो दिवसीय दौरे के दौरान, केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत 375 लाख रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और जैविक मछली पालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का शुभारंभ करेंगे।
मंत्री महोदय मत्स्यपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित करेंगे और मुख्यमंत्री मत्स्य विकास योजना (एमएमएमयूवाई) के तहत चेक भी वितरित करेंगे। वे मत्स्यपालकों से बातचीत करेंगे और विभिन्न मत्स्य विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा करेंगे।
इस दौरे के तहत, सिंह मांगशिला स्थित जीवित मछली बिक्री केंद्र में मछली पालक सहकारी समिति के सदस्यों से बातचीत करेंगे और मछली विपणन तथा सहकारी गतिविधियों से संबंधित उनकी आवश्यकताओं का आकलन करेंगे। वे मांगन स्थित जिला प्रशासनिक केंद्र में मछली पालन विकास कार्यक्रम (पीएमएमएसवाई) के तहत शुरू की गई पहलों और मत्स्य विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।
सिक्किम सरकार, जिला प्रशासन, मत्स्य विभाग, आईसीएआर मत्स्य संस्थानों और अन्य संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के इन कार्यक्रमों में भाग लेने की उम्मीद है।
प्रचुर मीठे जल संसाधनों, विविध जलीय पारिस्थितिक तंत्रों और समृद्ध जैव विविधता से युक्त पूर्वोत्तर क्षेत्र में सतत मत्स्य पालन और जलीय कृषि विकास की अपार संभावनाएं हैं। सरकार जैविक प्रमाणीकरण, पता लगाने की क्षमता, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार संबंधों के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
पीएमएमएसवाई के तहत, सरकार ने उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन को एकीकृत करने के लिए क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। अब तक, सिक्किम और मेघालय में जैविक मत्स्य पालन क्लस्टरों सहित देश भर में 34 मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य उत्पादकों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर बाजार तक पहुंच में सुधार करना, मत्स्य उत्पादों के मूल्य को बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
केंद्रीय मंत्री की यह यात्रा केंद्र सरकार की उस सुनियोजित व्यवस्था का हिस्सा है जिसके तहत केंद्रीय मंत्री समय-समय पर पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा करते हैं ताकि विकास कार्यक्रमों की समीक्षा की जा सके और लाभार्थियों और हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके।