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भारत की विदेश नीति का केंद्रीय स्तंभ है विकास सहयोग: UN में सांसद संगीता कुमारी सिंह देव

Posted on: 2026-10-23
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भारत की विदेश नीति का केंद्रीय स्तंभ है विकास सहयोग: UN में सांसद संगीता कुमारी सिंह देव

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की नेता और ओडिशा के बलांगीर से भाजपा सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने गुरुवार को इंडिया-UN फंड के वार्षिक आयोजन-2026 में कहा कि भारत के लिए विकास सहयोग उसकी विदेश नीति का एक केंद्रीय स्तंभ है। उन्होंने आगे बताया कि यह फंड ग्लोबल साउथ के साथ भारत की व्यापक साझेदारी का हिस्सा है। इसे बहुपक्षीय ढांचे में संचालित किया जाता है, जिसमें रियायती वित्त, बुनियादी ढांचा, मानवीय सहायता, क्षमता निर्माण, डिजिटल सहयोग और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण शामिल हैं। पैसिफिक क्षेत्र से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक के देशों के प्रतिनिधियों ने इस मौके पर भारत की मदद की तारीफ की। 

संगीता सिंह देव ने कहा कि 2017 में 150 मिलियन डॉलर के वादे के साथ शुरू किया गया यह फंड दिखाता है कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग राष्ट्रीय स्तर पर समाधान कैसे आगे बढ़ा सकता है और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को तेज कर सकता है। उन्होंने भारत द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रमों की खासियत बताते हुए कहा कि इनमें प्राप्तकर्ता देशों का सम्मान किया जाता है और वे अपनी प्राथमिकताएं खुद तय करते हैं। 

उन्होंने कहा “हमारा तरीका मांग-आधारित, सलाह-मशविरे वाला और आपसी सम्मान, आपसी लाभ तथा संप्रभुता के सम्मान से निर्देशित है।” “साझेदार देश अपनी प्राथमिकताएं पहचानते हैं और हम उन प्राथमिकताओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए मिलकर काम करते हैं।” 

UN अंडर-सेक्रेटरी-जनरल ने बताया—64 देशों में 94 परियोजनाएं, लोगों की जिंदगी बदली 

संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल हाओ लियांग जू ने कहा कि इंडिया-UN डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड ने 64 देशों में 94 परियोजनाओं को समर्थन दिया है। यह भारत के वित्तीय संसाधनों और विकास अनुभव को साझेदार देशों की जरूरी जरूरतों से जोड़ता है और प्रभावी दक्षिण-दक्षिण सहयोग के सिद्धांतों का उदाहरण पेश करता है। 

उन्होंने बुर्किना फासो की अपनी हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि भारत के सहयोग से न्यांडो बांध निर्माण, सिंचाई, महिला सहकारी समितियां, सामुदायिक मत्स्य पालन और स्कूल सुधार जैसे काम हुए, जिनसे 50,000 से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचा। उन्होंने कहा “भारत के समर्थन ने लोगों की जिंदगी को छुआ है।” 

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि विकास सहयोग का हमारा नजरिया ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सभ्यतागत सिद्धांत पर आधारित है—पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने जोर दिया कि ग्लोबल साउथ में अनुभव साझा करने, क्षमताओं को मजबूत करने और साथ मिलकर आगे बढ़ने से तरक्की ज्यादा टिकाऊ होती है।

तुवालु से क्यूबा तक—देशों ने जताई कृतज्ञता 

तुवालु के स्थायी प्रतिनिधि तपुगाओ फलेफौ ने इसे अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन बताया। उनके देश में फुनाओटा समुदाय के लिए सोलर होम स्टैंडअलोन ऊर्जा प्रणाली लगाने जैसी परियोजनाएं चल रही हैं, जिससे विश्वसनीय और सतत ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। 

श्रीलंका के स्थायी प्रतिनिधि जयंता जयसूर्या ने कहा कि विकास वित्तपोषण पर दबाव बढ़ने के समय ग्लोबल साउथ द्वारा संचालित सहायता कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने 2022 के आर्थिक संकट के दौरान भारत के एक अरब डॉलर के क्रेडिट और पिछले नवंबर में चक्रवात डिटा के समय ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत 24 घंटे के अंदर राहत पहुंचाने का जिक्र किया। 

मोल्दोवा के प्रतिनिधि घोरघे लेउका ने इस साल की थीम ‘साउथ-लेड सॉल्यूशंस: शेयर्ड रिजल्ट्स’ की सराहना करते हुए बताया कि उनके देश में राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो को आबादी और प्रवासन पर विश्वसनीय डेटा बनाने में मदद मिली। तंजानिया के प्रतिनिधि तोगोलानी एड्रिस मावोरा ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों से निपटने के लिए फंड के जलवायु परिवर्तन एवं लचीलापन कार्यक्रम को समयानुकूल और रणनीतिक बताया। 

क्यूबा के स्थायी प्रतिनिधि अर्नेस्टो सोबेरॉन गुज़मैन ने कहा कि वैश्विक दक्षिण में भारत की नेतृत्व क्षमता और समर्थन बेहद जरूरी है। उन्होंने मातृ एवं नवजात मृत्यु दर तथा बीमारियों को कम करने वाले हालिया समर्थन की खास तौर पर प्रशंसा की। पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के निदेशक जारबाज़ बारबोसा ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभाव का जिक्र करते हुए पैराग्वे की निवाक्ले समुदाय की एक मां लेटिसिया के शब्द दोहराए—“उन्होंने हमारी संस्कृति और एक मां के दिल को समझा है।” 

इस आयोजन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, सांख्यिकीय सर्वेक्षण और मातृ स्वास्थ्य जैसी परियोजनाओं के जरिए मिली ठोस मदद का जिक्र किया और भारत के सहयोग को सराहा

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