IMG-LOGO

टेक्नोलॉजी को समावेशी और सतत विकास का माध्यम बनना चाहिए: प्रधानमंत्री

Posted on: 2026-10-07
IMG
टेक्नोलॉजी को समावेशी और सतत विकास का माध्यम बनना चाहिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस से पहले सेवा तीर्थ में ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (जीएसएमए) के बोर्ड सदस्यों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को समावेशी और सतत विकास का माध्यम बनना चाहिए तथा इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित समाधान विकसित करने, उभरती तकनीकों के लिए वैश्विक मानकों और साझा नियमों पर जोर देने तथा 6जी, एआई, साइबर सुरक्षा और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

ग्लोबल साउथ तक किफायती तकनीक पहुंचाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी की जन-जन तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि समाज का कोई भी वर्ग विकास की दौड़ में पीछे न छूटे। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए तकनीक और डिजिटल सेवाओं को किफायती और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल विभाजन को बढ़ने से रोकने के लिए टेक्नोलॉजी को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होगा।

विकासशील देशों के लिए डीपीआई बड़ी ताकत

पीएम मोदी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की क्षमता को विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए परिवर्तनकारी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न वैश्विक नेताओं के साथ डीपीआई को लेकर हुई चर्चाओं ने इसकी बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि डीपीआई जैसे प्लेटफॉर्म ग्लोबल साउथ के लिए प्रगति और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

साइबर धोखाधड़ी से निपटने में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी

डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती चुनौती का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित समाधान विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने संभावित फर्जी कॉल के प्रति लोगों को सतर्क करने के लिए लगातार जागरूकता संदेश चलाने का सुझाव दिया, ताकि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

डीपफेक और एआई कंटेंट की पहचान आसान बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने उभरती तकनीकों के लिए वैश्विक मानकों और साझा नियमों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने डीपफेक और एआई से तैयार होने वाली सामग्री के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए ऐसे तकनीकी तरीके विकसित करने का सुझाव दिया, जिनसे उपयोगकर्ता किसी सामग्री के स्रोत की तुरंत पहचान कर सकें। उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भरोसेमंद डिजिटल वातावरण तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

भारत के डिजिटल बदलाव की जीएसएमए बोर्ड सदस्यों ने सराहना की

जीएसएमए बोर्ड के सदस्यों ने डिजिटल और मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भारत के वैश्विक अग्रणी देश के रूप में उभरने की सराहना की। उन्होंने 4जी और 5जी नेटवर्क के तेजी से विस्तार, बड़े पैमाने पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास तथा टेलीकॉम और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विस्तार को भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।

निवेश-अनुकूल नीतियों और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ

बोर्ड सदस्यों ने भारत के निवेश-अनुकूल पॉलिसी फ्रेमवर्क की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, मजबूत और विश्वसनीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में निरंतर डिजिटल विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दूरसंचार क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भारत के डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक टेक्नोलॉजी साझेदारियों के लगातार विस्तार की भी सराहना की।

6जी और एआई में वैश्विक सहयोग के नए अवसर

जीएसएमए बोर्ड के सदस्यों ने 5जी, 6जी, एआई, साइबर सुरक्षा, डिजिटल समावेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने इन क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक तकनीकी साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर, जीएसएमए बोर्ड के सदस्य और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जीएसएमए एक वैश्विक संगठन है, जो मोबाइल इकोसिस्टम को एकीकृत करने के साथ मोबाइल ऑपरेटरों और मोबाइल इकोसिस्टम से जुड़े उद्योगों का प्रतिनिधित्व करता है।

Tags: