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नेपाली पीएम का सुप्रीम कोर्ट को जवाब, भ्रष्टाचार को एंटी करप्शन ब्यूरो के बूते खत्म करना असंभव

Posted on: 2026-08-21
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नेपाली पीएम का सुप्रीम कोर्ट को जवाब, भ्रष्टाचार को एंटी करप्शन ब्यूरो के बूते खत्म करना असंभव


काठमांडू, 21 अगस्त। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) को जवाब देते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति छिपाने की प्रवृत्ति को केवल एंटी करप्शन ब्यूरो के माध्यम से खत्म करना संभव नहीं है। सरकार द्वारा गठित संपत्ति जांच आयोग को खारिज करने की मांग को लेकर दायर रिट पर लिखित जवाब देते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि जांच आयोग और ब्यूरो के कार्य अलग-अलग हैं।

प्रधानमंत्री के जवाब में कहा गया है, “किसी भी पदाधिकारी की संपत्ति की जांच कर मुकदमा चलाने के लिए संविधान द्वारा अधिकृत संवैधानिक निकाय अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग है। लेकिन देशभर में लंबे समय तक सत्ता में रहे लगभग सभी राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की संपत्ति का संग्रह, जांच और अनुसंधान करना अख्तियार के लिए संभव नहीं दिखता।”

उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार, अवैध तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित करने और ऐसी संपत्ति छिपाने वाले समूहों के पनपने की स्थिति बनी है।प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समूहों का राज्य की ओर से पता लगाकर उन्हें दंडित नहीं किए जाने को लेकर जनता में जो आशंका है, उसे दूर करने के लिए भी संपत्ति जांच आयोग आवश्यक है।

पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्र भण्डारी की अध्यक्षता में गठित इस आयोग में तत्कालीन पुनरावेदन अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, उच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश चण्डीराज ढकाल, पूर्व पुलिस नायब महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल सदस्य हैं।

इस आयोग के खिलाफ दायर रिट पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश टेकप्रसाद ढुंगाना और श्रीकान्त पौडेल की संयुक्त पीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए मामले को पूर्ण पीठ के समक्ष पेश करने का आदेश दिया था। हालांकि, पीठ के आदेश के अनुसार पूर्ण पीठ में मामला पेश होने से पहले ही प्रधान न्यायाधीश डॉ. मनोजकुमार शर्मा ने इसे संवैधानिक पीठ के समक्ष पेश करने का प्रशासनिक निर्णय लिया।

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