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वन धन विकास केंद्र से आत्मनिर्भर बनीं गरियाबंद की पीवीटीजी महिलाएं

Posted on: 2026-08-19
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वन धन विकास केंद्र से आत्मनिर्भर बनीं गरियाबंद की पीवीटीजी महिलाएं

गरियाबंद 19 अगस्त 2026

वन धन केंद्र प्रधानमंत्री जन मन योजना का एक प्रमुख हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य वनों से मिलने वाली उपज का सही उपयोग करके आदिवासी लोगों और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। वनों की उपज (जैसे इमली, महुआ, आंवला, शहद और जड़ी-बूटियाँ) को इकट्ठा करने और उन्हें बेहतर बनाने का काम करता है।

महिलाओं ने कीआत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम
      छत्तीसगढ के गरियाबंद जिले के केशोडार गांव की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की महिलाओं ने मेहनत, प्रशिक्षण और शासकीय योजनाओं के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति, केशोडार से जुड़ी महिलाएं अब स्थानीय वन उपज से हर्बल और औषधीय उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं।

महिलाओं को आधुनिक मशीनरी और बाजार उपलब्ध कराने की पहल
      प्रधानमंत्री जनमन (पीएम-जनमन) योजना के माध्यम से पीवीटीजी परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड के सहयोग से केशोडार वन धन विकास केंद्र में महिलाओं को प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनरी और बाजार उपलब्ध कराने की पहल की गई है।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में मूल्य संवर्धन पर जोर
    वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वनवासियों और विशेष जनजातीय समूहों की महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए वनोपज के मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका सीधा लाभ केशोडार की महिलाओं को मिल रहा है। अब वे केवल कच्ची वन उपज बेचने के बजाय उससे उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।

1.84 करोड़ रुपये का कारोबार, 15 लाख रुपये का लाभ
      वन धन विकास केंद्र की अध्यक्ष श्रीमती भारतीय सोरी के नेतृत्व में समिति ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2023-24 तक केंद्र ने करीब 1.84 करोड़ रुपये का कारोबार किया और इस दौरान लगभग 15 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।

विपणन सहयोग ने महिलाओं  मिली को नई दिशा
      केंद्र में अश्वगंधा चूर्ण, प्राकृतिक तेल सहित विभिन्न हर्बल और औषधीय उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। आधुनिक मशीनरी, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग ने महिलाओं के काम को नई दिशा दी है।

वन उपज से रोजगार और सम्मान तक
     केशोडार की महिलाओं की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन होने पर स्थानीय संसाधन ही रोजगार और आय का मजबूत आधार बन सकते हैं। वन विभाग के सहयोग और पीएम-जनमन योजना से मिली सुविधाओं ने इन महिलाओं को स्थायी आजीविका का अवसर दिया है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में छत्तीसगढ़ की एक प्रेरक मिसाल
    आज केशोडार की पीवीटीजी महिलाएं अपने हुनर से आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ समाज में नई पहचान भी बना रही हैं। वन धन विकास केंद्र उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी बनकर उभरा है। यह पहल महिला सशक्तिकरण, वन उपज के मूल्य संवर्धन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में छत्तीसगढ़ की एक प्रेरक मिसाल है।

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