अटल परिसर योजना के तहत स्थापित की गई अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा में दरारें,जांच के आदेश
Posted on:
2026-08-08
अटल परिसर योजना के तहत स्थापित की गई अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा में दरारें,जांच के आदेश
रायपुर, 08 अगस्त। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर नगर पंचायत में भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा में भ्रष्टाचार और खराब गुणवत्ता का एक बड़ा मामला सामने आया है। बारिश के बाद प्रतिमा का रंग उखड़ने और उसमें दरारें आने के कारण अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
उल्लेखनीय है कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की स्मृति को चिर स्थाई बनाने के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश भर के नगरीय निकायों में अटल परिसर बनाने की योजना तैयार की।अटल परिसरों में घटिया मूर्ति लगाए जाने का जो सिलसिला कटघोरा से शुरू हुआ है, वह आगे बढ़ता ही जा रहा है। सरगुजा के सीतापुर नगर पंचायत में भी बारिश ने मूर्ति की पोल खोल दी है।
सरगुजा जिले के सीतापुर नगर पंचायत में स्थापित भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्य के लिए लगभग 6.99 लाख रुपये का ठेका दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमेंट की मूर्ति के कारण वास्तविक लागत बहुत कम आई है और भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई है।
ठेकेदार ने करीब 6.99 लाख रुपये में यह काम लिया था। प्रतिमा में दरार और पपड़ी निकलने के बाद विधायक रामकुमार टोप्पो ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।नगर पंचायत के सीएमओ ओमप्रकाश शर्मा के अनुसार, गुणवत्ता को लेकर पहले से ही संशय था, जिसके कारण ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया है।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट और उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सीतापुर के वार्ड क्रमांक-10 स्थित आहारा तालाब के अटल परिसर में 25 दिसंबर 2025 को अटल जयंती पर यह प्रतिमा स्थापित की गई थी। स्थापना के 6 महीने बाद ही बारिश के बाद प्रतिमा में दरारें पड़ गईं और बाहरी पेंट उखड़ने लगा। भीतर से सीमेंट जैसी सामग्री दिखने का दावा किया जा रहा है। बारिश में मूर्ति में लगाई गई पेंट भी धुल गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रतिमा का निर्माण धातु से करना बताया गया है, लेकिन इसमें दरारें और टूट-फूट आने से इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि यह प्रतिमा विशुद्ध रूप से कांस्य (ब्रांज) से निर्मित है, तो इसमें इस तरह की क्षति होना संभव नहीं है। इसमें मिश्रित धातु का उपयोग किया है या फिर इसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच विशेषज्ञों से कराई जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के का कटघोरा और मरवाही में भी प्रतिमाओं में ऐसी ही खामियां सामने आईं हैं।अब पूरे प्रदेश में स्थापित सभी मूर्तियों की जांच के लिए अभियान चलाने की मांग उठ रही है।स्थानीय जिला कलेक्टर्स और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को इसकी बारीकी से जांच के निर्देश दिए गए हैं।