(SEBI) ने
ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL),
इसके
CEO पुनीत गोयनका और
एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा को सिक्योरिटीज़ मार्केट में जाने से रोक
दिया है। यह कार्रवाई कंपनी की हैदराबाद प्रॉपर्टी को गिरवी रखने से जुड़ी
गड़बड़ियों का पता चलने के बाद की गई है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI के अर्ध-न्यायिक
अधिकारी एन. मुरुगन ने अपने अंतिम आदेश में ZEEL
को
दो महीने के लिए सिक्योरिटीज़ मार्केट में जाने से रोक दिया, जबकि गोयनका और
चंद्रा पर 12 महीने
की रोक लगाई गई है।
रेगुलेटर
ने कुल 1.48 करोड़ रुपये का
जुर्माना भी लगाया, जिसमें
ZEEL पर 30 लाख रुपये, गोयनका पर 58 लाख रुपये और
चंद्रा पर 60 लाख
रुपये का जुर्माना शामिल है। यह मामला तब शुरू हुआ जब ZEEL के वैधानिक
ऑडिटर्स ने FY2018-19 के
ऑडिट के दौरान बताया कि कुछ अचल संपत्तियों (immovable
properties) के मालिकाना हक के कागजात (title deeds) गायब
थे। इस जानकारी के बाद, SEBI ने
जांच की कि क्या इन लेन-देन से लिस्टिंग नियमों और धोखाधड़ी व अनुचित व्यापार
प्रथाओं से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।
SEBI के
आदेश के अनुसार, एस्सेल
ग्रुप की चार कंपनियों — ग्नेक्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, विवेक इन्फ्राकॉन
प्राइवेट लिमिटेड, ग्नेक्स
इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड और रेणु रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड — ने दिसंबर 2016 में इंडियाबुल्स
हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) से 726 करोड़ रुपये का
लोन लिया था। इस व्यवस्था में एस्सेल होम प्राइवेट लिमिटेड ने सह-उधारकर्ता (co-borrower) के
तौर पर काम किया था। SEBI ने
पाया कि जब उधारकर्ता ज़रूरी सिक्योरिटी कवर बनाए रखने में नाकाम रहे, तो IHFL ने नवंबर 2018 में अतिरिक्त
कोलेटरल (गिरवी रखने के लिए अतिरिक्त संपत्ति) की मांग करते हुए नोटिस जारी किए।
इसके बाद, 27 दिसंबर 2018 को ZEEL की ओर से एक
घोषणा और स्वीकृति पत्र (Declaration and
Acknowledgement) तैयार किया गया, जिसके तहत कंपनी
की हैदराबाद स्थित ज़मीन के मालिकाना हक के मूल कागजात IHFL के पास अतिरिक्त
सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी (first-ranking
mortgage) रखे गए।
रेगुलेटर
ने कहा कि घोषणा में दावा किया गया था कि ZEEL
ने
गिरवी रखने की प्रक्रिया के लिए सभी ज़रूरी कॉर्पोरेट मंज़ूरियां ले ली थीं।
हालांकि, SEBI की जांच में ZEEL की ऑडिट कमेटी, बोर्ड ऑफ़
डायरेक्टर्स या शेयरधारकों से कोई पूर्व मंज़ूरी नहीं मिली। SEBI ने यह भी नोट
किया कि बाद में ZEEL ने
रेगुलेटर को बताया कि उसके मैनेजमेंट और बोर्ड को इस गिरवी रखने की व्यवस्था के
बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन्होंने इस लेन-देन के लिए कोई मंज़ूरी नहीं दी
थी। ऑर्डर में बताया गया कि FY2018-19 और FY2019-20 के
लिए ZEEL के फाइनेंशियल
स्टेटमेंट में कर्ज लेने वाली कंपनियों से जुड़ी मध्यस्थ संस्थाओं को \'रिलेटेड पार्टी\' (संबंधित पक्ष) के
तौर पर दिखाया गया था। SEBI ने
निष्कर्ष निकाला कि यह मॉर्गेज एक \'रिलेटेड-पार्टी
ट्रांज़ैक्शन\' था, जिसके लिए उचित
मंज़ूरी और जानकारी का खुलासा ज़रूरी था। रेगुलेटर ने माना कि ZEEL, गोयनका और चंद्रा
ने लागू SEBI LODR रेगुलेशन
और PFUTP रेगुलेशन का
उल्लंघन किया है और उन्हें 45 दिनों
के भीतर जुर्माना भरने का निर्देश दिया।