मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच गुरुवार को हुई द्विपक्षीय बैठक में चीन के हालिया इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने जताई चिंता
विदेश मंत्रालय (एमईए) की विशेष मीडिया ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि चीन के आईसीबीएम परीक्षण का मुद्दा ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने उठाया। उन्होंने बताया कि अल्बनीज ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांति, सुरक्षा और स्थिरता वाला क्षेत्र बनाए रखने के पक्ष में है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझा सोच
मिस्री के अनुसार, भारत और ऑस्ट्रेलिया के इस मुद्दे पर समान हित और समान उद्देश्य हैं। दोनों देशों ने भविष्य में भी इस विषय पर विचार-विमर्श जारी रखने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी चिंता
सोमवार को चीन की एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी ने प्रशांत महासागर की दिशा में मिसाइल का परीक्षण किया था। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र के कई देशों ने चिंता व्यक्त की और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बताया।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की प्रतिक्रिया
क्योडो न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस मिसाइल लॉन्च को “क्षेत्र के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला” बताया। वहीं, न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि उनका देश परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों के परीक्षण को लेकर चिंतित है। उन्होंने इसे चीन की “बार-बार दोहराई जाने वाली नीति” करार देते हुए 2024 में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में किए गए आईसीबीएम परीक्षण का भी उल्लेख किया।
ताइवान ने भी की आलोचना
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण की निंदा की। कार्यालय की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने कहा कि बीजिंग इस तरह के परीक्षणों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने की कोशिश कर रहा है, जिससे वैश्विक शांति और स्थिरता प्रभावित होती है। उन्होंने चीन से संयम बरतने, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने और ऐसी एकतरफा कार्रवाइयों को तत्काल रोकने की अपील की।